Sadhana Shankar’s column – Who will be the real owner of AI generated content? | साधना शंकर का कॉलम: एआई निर्मित कंटेंट का असली मालिक कौन होगा?


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3 घंटे पहले

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साधना शंकर लेखिका और पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी - Dainik Bhaskar

साधना शंकर लेखिका और पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी

जेनरेटिव एआई से बनाई छवियों, कलाकृतियों और लेखों से सोशल मीडिया भरा पड़ा है। इन एआई मॉडल्स की मालिक कंपनियां अब अरबों डॉलर की हो चुकी हैं। चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई की मार्केट वैल्यू 90 अरब डॉलर (7.4 लाख करोड़ रु) है, जबकि प्रतिस्पर्धी माइक्रोसॉफ्ट की वैल्यू 3.1 ट्रिलियन डॉलर (250 लाख करोड़ रु) के आसपास है।

इन कंपनियों के एआई मॉडल्स को भारी-भरकम डेटा के साथ प्रशिक्षित किया गया है, फिर चाहे टेक्स्ट हों, तस्वीरें, वीडियो या फिर संगीत। इसलिए सवाल उभरकर आ रहा है कि इन मॉडल्स को प्रशिक्षित करने से पहले इस डेटा के मालिक या लेखकों से अनुमति नहीं ली गई थी? उस डेटा के रचना-कर्ता इंसान हैं और अधिकांश कॉपीराइट कानूनों से संरक्षित है।

अतीत में ओपनएआई के खुलासे से पता चलता है कि चैटजीपीटी-3 को इंटरनेट सहित विभिन्न स्रोतों पर प्रशिक्षित किया गया था, जिसमें बड़ी मात्रा में कॉपीराइट डेटा शामिल था। आरोप हैं कि जेनरेटिव एआई मॉडल चोरी के सामग्री से बने हैं। इससे एआई मॉडल की मालिक कंपनियों पर मुकदमे शुरू हो गए हैं।

बड़े अखबार ओपनएआई व माइक्रोसॉफ्ट पर केस कर रहे हैं, एक बड़ी म्यूजिक लेबल कंपनी एंथ्रोपिक को अपने गीतों के बोल, बिना अनुमति इस्तेमाल करने के लिए अदालत में खींच रही है, वहीं वेब इमेज की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में से एक अपनी तस्वीरों का इस्तेमाल करने के लिए स्टेबिलिटी एआई कंपनी पर केस कर रही है।

हालांकि ये कंपनियां आरोपों को नकारती हैं। तर्क दिया जा रहा है कि जैसे मनुष्य कुछ नया निर्मित करने के लिए पहले से मौजूद सामग्री को ग्रहण करता है, उसी तरह एआई भी कुछ अलग बनाने के लिए उपलब्ध सामग्री से प्रशिक्षण लेती है।

कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन बदलती दुनिया टेक्नोलॉजी से उत्पन्न चुनौतियां अपनाने की कोशिश कर रही है। जेनरेटिव एआई कंपनियों के मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए कई कंपनियां अपने डेटा का इस्तेमाल करने का लाइसेंस दे रही हैं। कॉपीराइट से सुरक्षित सामग्री के मालिक अब अपने एआई टूल्स बना रहे हैं, जिन्हें अंदरुनी डेटा पर प्रशिक्षित किया जा सके।

कंटेंट के मालिकों और जेनरेटिव एआई मॉडल के मालिकों के बीच चल रही यह रस्साकशी कॉपीराइट कानूनों की मौजूदा स्थिति के अनुसार उनकी पर्याप्तता पर भी सवाल उठा रही है। क्या कॉपीराइट कानून एआई से बनाए कंटेंट पर भी लागू होंगे?

भारत में 2020 में कॉपीराइट कार्यालय ने एक आवेदन को अस्वीकार कर दिया जिसमें एआई (राघव) को एक कलाकृति के एकमात्र रचना-कर्ता के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि दूसरा आवेदन भी दिया गया, जिसमें एक व्यक्ति और एआई (राघव) को संयुक्त रूप में प्रस्तुत किया गया और कॉपीराइट का पंजीयन स्वीकार कर लिया गया। बाद में इस रजिस्ट्रेशन को वापस लेने का नोटिस भी जारी किया गया।

सवाल उभरता है कि फिर एआई से बने कंटेंट का मालिक कौन होगा। चैटजीपीटी के नियम व शर्तें कहते हैं कि शुरुआती तौर पर तो वह उस कंटेंट का मालिक है, लेकिन बाद में स्वामित्व उपयोगकर्ता को स्थानांतरित कर दिया जाता है, जिसके कारण वो कंटेंट बना।

सवाल है कि अगर चैटजीपीटी कई सारे उपयोगकर्ताओं के लिए एक-जैसी सामग्री उत्पन्न कर देता है, तो कोई भी इस पर अपना दावा नहीं कर सकता। मौजूदा कानूनी ढांचा ऐसे सवालों का स्पष्ट रूप से जवाब नहीं देते हैं।

जेनरेटिव एआई के कारण जीवन का हर क्षेत्र बदल रहा है और जो मुद्दे सामने आ रहे हैं वे जटिल हैं। बस एक बार स्वामित्व और रचनात्मकता के परिवर्तित कानून और इसकी धारणाएं मानव जीवन में ढल जाएं तो तमाम बहसें, मुकदमे और चर्चाएं अंततः सुलझ जाएंगी।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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