Pt. Vijayshankar Mehta’s column – Public awareness towards culture and character is very important | पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: संस्कार और चरित्र के प्रति जन जागृति बहुत जरूरी है


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5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

हमारे देश में कई किस्म की चिंताएं चल रही हैं। एक फिक्र ये भी है कि हम 144 करोड़ हो चुके हैं। और इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए भोजन, स्वास्थ्य और रोजगार ये अब अलग समस्या के रूप में सामने आएंगे।

25 साल बाद, 70 प्रतिशत भोजन की और अधिक आवश्यकता होगी। अभी भी हमारे देश में कई लोग भूखे उठते हैं और भूखे ही सोते हैं, तो आने वाले 25 सालों में क्या होगा? इस जनशक्ति का हमें सदुपयोग करना पड़ेगा। आने वाले समय में पीने के पानी के ठिकाने नहीं होंगे।

जीवनशैली में लगातार विलास उतरेगा और विलास के कारण अपराध आएगा। कदम-कदम पर युद्ध है और इसी का नाम जिंदगी है। पग-पग पर हार-जीत, इसी का नाम उम्र है। इसलिए जनसंख्या पर नियंत्रण अपने ढंग से सरकारें करेंगी, पर जनशक्ति का उपयोग धार्मिक जगत में ही हो पाएगा।

हमारे देश में साधु-संतों की अद्भुत परंपरा है और वे ही जनशक्ति को मनुष्य जीवन का सदुपयोग सिखा रहे हैं। अगर समाज की दृष्टि से देखें तो विलास ने अपराध इतने बढ़ा दिए कि अब उम्र का कोई लेना देना नहीं है।

नाबालिग ऐसे-ऐसे अपराध कर रहे हैं कि वो वयस्क की श्रेणी को भी लांघ दें। ऐसे में बढ़ती जनसंख्या में जन जागृति भी बहुत जरूरी है और खास तौर पर संस्कार और चरित्र के प्रति तो बहुत ज्यादा।

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