Pt. Vijayshankar Mehta’s column- Explain the true definition of love to your children | पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने बच्चों को प्रेम की सच्ची परिभाषा समझाएं


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1 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

दुनिया में कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनके अर्थ लोग ठीक से नहीं समझ पाए। बल्कि अधिकांश मामलों में उनका उल्टा ही अर्थ ले लिया गया। ऐसा ही एक शब्द है प्रेम। प्रेम को स्त्री-पुरुष का अमर्यादित आकर्षण या फिल्मों का विषय समझ लिया गया। पर क्या प्रेम केवल इतना ही है?

आज जब माता-पिता बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दे रहे हैं, जानकारियां पहुंचा रहे हैं, ऐसे समय में बच्चों को प्रेम का अर्थ भी समझाया जाए। आने वाली पीढ़ी भीतर से प्रेमिल नहीं हुई, तो बाहर से सूखा बारूद बन जाएगी। प्रेम के साथ गहराई, अहसास, क्षमा, अपेक्षा… देह से ऊपर इन बातों को समझाने पर बच्चे प्रेम का अर्थ समझ जाएंगे।

ऐसा कहते हैं, खुद से प्यार करें तो प्रेम का मतलब समझ में आएगा। लेकिन इसमें खुद है क्या? दरअसल खुद का मतलब है आत्मा। गीता के 13वें अध्याय में कृष्ण ने कहा है- ‘इदं शरीरं क्षेत्रम यः वेत्ति तम् क्षेत्रज्ञः।’ क्षेत्र शरीर को कहा है, क्षेत्रज्ञ आत्मा को कहा है। इसका मतलब है कि हम आत्मा हैं, अभी इस शरीर में है। खुद को पहचानने का मतलब अपनी आत्मा से जुड़ें, तो प्रेम अच्छे से समझ में आएगा।

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