How hesitant to ask for help to fulfill her dreams, Neena Gupta’s success after 60 is an example for the rest of the cast | अपने सपने पूरे करने के लिए मदद मांगने में झिझक कैसी, 60 की उम्र के बाद नीना गुप्ता की सफलता बाकी कलाकारों के लिए एक मिसाल है

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2 दिन पहले

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अनुपमा चोपड़ा, संपादक - Dainik Bhaskar

अनुपमा चोपड़ा, संपादक

आज से दो साल पहले नीना गुप्ता ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली थी- ‘मैं एक अच्छी एक्ट्रेस हूं और मुझे काम की जरूरत है।’ ऐसा लिखने से कई लोग कतराएंगे। लेकिन नीना गुप्ता ने यह किया। वह नहीं झिझकीं। महसूस नहीं होने दिया कि इससे उनका कद छोटा हो जाएगा। या काम की जरूरत बोलने में बहुत बड़ा फर्क पड़ जाएगा।

संयोग देखिए कि सोशल मीडिया की उस पोस्ट के बाद से उनका कॅरिअर उड़ान पर है। ‘बधाई हो’ से लेकर ‘मसाबा’ में भी उनका बहुत अच्छा काम था। उनकी कहानी बाकी कलाकारों के लिए अब एक मिसाल बन चुकी है। नीना गुप्ता की सफलता मिसाल है। 60 प्लस होने के बाद वह एक फुल फ्लेजेड स्टार बनी हैं। पिछले महीने ही उनकी फिल्म रिलीज हुई थी ‘सरदार का ग्रैंडसन।’ उसमें लीड एक्टर हैं। इस महीने उनकी आत्मकथा ‘सच कहूं तो’ रिलीज होने वाली है। उनके सफर का सार है ‘एक्टर को कभी गिव अप नहीं करना चाहिए।’

लोगों को शायद पता नहीं कि नीना गुप्ता ने पहले भी बहुत अच्छा काम किया है। आठवें दशक में जो फिल्मों में आर्टहाउस मूवमेंट चला था, उसमें उनका नाम भी प्रमुखता से आता है। हालांकि उन्हें स्मिता पाटिल या शबाना आज़मी वाली लोकप्रियता और सफलता नहीं मिली। उस जमाने की दो सबसे अहम फिल्मों ‘जाने भी दो यारो’, श्याम बेनेगल की ‘मंडी’ और ‘त्रिकाल’ में उनकी मौजूदगी थी। फिर 90 के दशक में टेलीविजन ने स्टारडम दिया। जब वह धारावाहिक ‘सांस’ कर रही थी।

‘सांस’ से पहले खानदान सीरियल भी किया था। अमीर लोगों के बारे में अमेरिकन सीरियल ‘डायनेस्टी’ में भी वह लीड रोल में थी। बहरहाल फिल्मों में जो लोकप्रियता मिलनी चाहिए थी वह अब जाकर उन्हें मिली है। नीना गुप्ता सिर्फ वैसा ही काम कर रही हैं, जो उन्हें अपील कर रहा है।

बहुत लोगों को शायद पता भी ना हो कि उन्हें एक्टिंग के लिए और एक शार्ट फिल्म ‘बाज़ार सीताराम’ के निर्देशन के लिए नेशनल अवार्ड भी मिला हुआ है। कुल मिलाकर एक एक्टर के सपने कि वह लीड रोल करे, कान फिल्म फेस्टिवल में उसकी फिल्म जाए.. अब जाकर उनके सपने पूरे हो रहे हैं। ये इस बात का सूचक है कि आपको कभी गिव अप नहीं करना चाहिए। आपके जो भी सपने हैं, अंत तक उनके पीछे भागना चाहिए।

दरअसल यह शो बिजनेस की खूबी है कि यहां पर कब आपका सितारा पलट जाए और कब लोग आपको नोटिस कर लें, कहा नहीं जा सकता। आप देखें तो इस उम्र में भी सोशल मीडिया पर काम मांगने के लिए हिम्मत चाहिए। नीना ने इन सब चीजों का कोई बोझ नहीं रखा। उनको कोई झिझक नहीं हुई। इस तरह के मिजाज वाले एक्टर बॉलीवुड में बहुत कम हैं। .

नीना मनपसंद के छोटे कपड़े भी बहुत कंफर्टेबल तरीके से पहनती हैं। गायकी भी करती हैं। बुजुर्ग महिलाओं या कलाकारों का पारंपरिक नजरिया नीना गुप्ता ने तोड़ा है। उन्हें इस बात का कोई गुस्सा नहीं है कि उन्हें अपने दौर में अच्छे रोल क्यों नहीं मिले! उन चीजों को लेकर वह शिकायती भाव नहीं रखती हैं। अभी जो उन्हें मिल रहा है, उसे वह चेरिश कर रही हैं। उसमें वह खुश हैं।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं।)

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