Corona taught that the festival of bicycles should continue | कोरोना ने सिखाया साइकिल का उत्सव जारी रहना चाहिए

3 दिन पहले कॉपी लिंक साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी जून के पहले सप्ताह में दो महत्वपूर्ण व आपस में संबद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस रहे। 3 जून को विश्व साइकिल दिवस, और 5 जून …


3 दिन पहले

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साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी - Dainik Bhaskar

साधना शंकर, लेखिका, भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी

जून के पहले सप्ताह में दो महत्वपूर्ण व आपस में संबद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस रहे। 3 जून को विश्व साइकिल दिवस, और 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। ये पोलिश अमेरिकन समाजशास्त्री और ट्रैक साइकिलिस्ट लेसेक सिबिलिस्की के अथक प्रयासों का ही नतीजा था कि अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने 3 जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में घोषित किया।

साधारण-सी साइकिल वाकई एक लंबा सफर तय कर चुकी है। चारपहिया का खर्च नहीं उठा सकने वालों के यातायात का साधन से लेकर अब इसके नाम से एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दिवस है! 1817 में साइकिल का पहला स्वरूप ईजाद करने का श्रेय जर्मन कार्ल वॉन ड्रैस को जाता है। इसके बाद साइकिल के कई टिकाऊ और ज्यादा सुरक्षित स्वरूप बनते चले गए।

1890 तक तो यूरोप और अमेरिका में इसका क्रेज-सा छा गया और तबसे साइकिल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। दो सदियों बाद यूएन ने साइकिल की सादगी, लोगों का इससे जुड़ा सामर्थ्य, पर्यावरण अनुकूल इस्तेमाल और स्वास्थ्य लाभ को मान्यता दी! शहरी क्षेत्रों से आने वाले हममें से अधिकांश लोगों के लिए साइकिल सीखना बचपन की सिर्फ एक सुनहरी याद है। लेकिन पिछले साल से दिल्ली की सड़कों पर कई साइकिल सवार दिखने लगे हैं। दुनिया में नीदरलैंड में प्रति व्यक्ति सर्वाधिक साइकिलें हैं, वहीं कोपेनहेगन दुनिया का सबसे ज्यादा साइकिल फ्रेंडली शहर है। यहां के 52% लोग रोज साइकिल से काम पर जाते हैं। जापान, फिनलैंड और चीन भी साइकिल के बड़े उपयोगकर्ता हैं।

लॉकडाउन के चलते कम ट्राफिक, सामाजिक दूरी और फिटनेस पर ध्यान के कारण कोरोना ने दुनिया भर में साइकिल को फिर से लोगों की नज़रों में ला दिया है। पेरिस साइकिल हब में तब्दील हो रहा है, दिल्ली की मुख्य सड़कों पर साइकिल लेन बनाई गई है। साइकिल की मांग तेजी से बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में दो अरब साइकिल हैं। अकेले भारत में ही बीते साल 1.45 करोड़ साइकिलों का निर्माण हुआ, उनमें 80% पंजाब में बनीं।

महिलाओं के सशक्तीकरण आंदोलन में भी साइकिल ने बड़ी भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे 19वीं सदी के उत्तरार्ध में साइकिल का प्रसार बढ़ता गया, महिलाओं की समानता के लिए आंदोलन भी पश्चिमी दुनिया में फैलते गए। दोनों आंदोलनों ने एक-दूसरे का ध्यान खींचा और साइकिल पर सवार महिला नई महिला का प्रतीक बन गई। साइकिल ने महिलाओं को उनकी आवाजाही बढ़ाने का एक सस्ता और सुरक्षित तरीका प्रदान किया।

आज भी, साइकिल ही लड़कियों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाओं और खेल गतिविधियों तक पहुंचने का जरिया है। साइकिल हर कोई इस्तेमाल कर सकता है- इसके व्यक्तिगत और सामाजिक लाभ हैं। आवाजाही के समाधान के रूप में सुरक्षित साइकिलिंग के बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन देने से शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता भी सुधरेगी। साइकिल फ्रेंडली शहर बनने की दिशा में कई जगह काम हो रहा है। साइकिल- इस साधारण पर कारगर सहायक का उत्सव मनाता है विश्व साइकिल दिवस।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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